आज आपके सामने बहुत सारी बातें करनी है माता के ऊपर और अमीरी और गरीबी के ऊपर तो पहले हम करते हैं माता की बात हमें जिसने जन्म दिया और जिसने हमें अपनी कमाई खिलाई और परवरिश करी आज वह वृद्ध आश्रम में है जो भैंस का हम दूध पीते हैं उसका कभी नाम नहीं लेते लेकिन जिस गांव का मूत्र पीते हैं उसकी हम बहुत तारीफ करते हैं लेकिन तारीफ करने के अलावा इसके साथ में और भी बहुत कुछ बातें हैं और बातें क्या है कि उन्हें माता को जिसको हमने राष्ट्रीय घोषित कर रखा है उन्हें कूड़ेदान पर छोड़कर चले आते हैं और वह अपना पेट कूड़े दान के कूड़े से भर्ती हैं अफसोस होता है उन माता को देखकर जो वर्धा आश्रम में मिलती है और यह कूड़ेदान में मिलती है अभी एक चीज और बता दे हम आपसे के पहले जो गरीब मिलते थे उनके फटे हुए कपड़े होते थे तो पता चल जाता था यह गरीब है लेकिन अब दुनिया का फेर बदल देखिए कि जिनके आज कपड़े फटे हुए हैं उन्हें हम अमीर कहते हैं तो यह कुदरत का हेर फेर है या इंसानियत का हेयर फेयर है अपने बदन ढकीय नहीं तो सर्दी लग जाएगी या गर्मी लग जाएगी शायद मेरी बातें अच्छी नहीं लगेगी और गलत बात लगे तो जरूर कमेंट करें और आप लोगों के दिल को छू जाए तो इसकी तारीफ करें धन्यवाद जय हिंद जय भारत इतना ही कहना था आपसे
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