आज आपके सामने बहुत सारी बातें करनी है माता के ऊपर और अमीरी और गरीबी के ऊपर तो पहले हम करते हैं माता की बात हमें जिसने जन्म दिया और जिसने हमें अपनी कमाई खिलाई और परवरिश करी आज वह वृद्ध आश्रम में है जो भैंस का हम दूध पीते हैं उसका कभी नाम नहीं लेते लेकिन जिस गांव का मूत्र पीते हैं उसकी हम बहुत तारीफ करते हैं लेकिन तारीफ करने के अलावा इसके साथ में और भी बहुत कुछ बातें हैं और बातें क्या है कि उन्हें माता को जिसको हमने राष्ट्रीय घोषित कर रखा है उन्हें कूड़ेदान पर छोड़कर चले आते हैं और वह अपना पेट कूड़े दान के कूड़े से भर्ती हैं अफसोस होता है उन माता को देखकर जो वर्धा आश्रम में मिलती है और यह कूड़ेदान में मिलती है अभी एक चीज और बता दे हम आपसे के पहले जो गरीब मिलते थे उनके फटे हुए कपड़े होते थे तो पता चल जाता था यह गरीब है लेकिन अब दुनिया का फेर बदल देखिए कि जिनके आज कपड़े फटे हुए हैं उन्हें हम अमीर कहते हैं तो यह कुदरत का हेर फेर है या इंसानियत का हेयर फेयर है अपने बदन ढकीय नहीं तो सर्दी लग जाएगी या गर्मी लग जाएगी शायद मेरी बातें अच्छी नहीं लगेगी और गलत बात लगे तो जरूर कमेंट करें और आप लोगों के दिल को छू जाए तो इसकी तारीफ करें धन्यवाद जय हिंद जय भारत इतना ही कहना था आपसे
Monday, December 25, 2023
Tuesday, December 12, 2023
आज का विषय शायद लोगों को कुछ को नहीं आएगा पसंद
बुजुर्गों कहते हैं गाय का भैंस का या बकरी का दूध सभी पी लेते हैं लेकिन एक जानवर ऐसा है जिसका दूध सिर्फ उसी के बच्चे पीते हैं और वह जानवर कौन सा है सूअर जिसकी माता का नाम होता है श्री उसका दूध सिर्फ उसी के बच्चे पी पाते हैं और उसी के जैसे होते हैं अगर जो सूअर जानवर को गाय भैंस के अंदर बीच में बांध दिया जाए तो वह फिर भी सूअर ही रहेगा और यह मैं भी समझता हूं और आप लोग भी समझते हैं जिसने गाय भैंस का दूध पिया होगा या बकरी का दूध पिया होगा वह ताकतवर भी होंगे और समझदार भी होंगे और लोगों में बैठने उठने वाले भी होंगे लेकिन समझने वाली बात यह है इंसान भी ऐसा ही काम करता है जिसके बड़े यह काम कर रहे हैं तो छोटा भी जरूर करेगा उसे कितना ही भी समझ ले लेकिन समझ में नहीं आता उनके और अपने आप को इतना हकदार और अच्छा कहते हैं कि लोग समझने भी लगते हैं लेकिन घर में वह जाकर फिर भी उसी तरह की हरकत करने लगते हैं इसका उदाहरण यह है जो लड़की अपनी ससुराल चली गई वह ससुराल ना मानकर अपना घर मानती है लेकिन ससुराल वाले उसे फिर भी बाहर वाली समझते हैं और खाने पीने के ऐसे ताने देते हैं कि जैसे कोई बड़ा एहसान कर रहे हैं घर में भाई काम करने वाली तीन से ₹10000 तक लेती है और वह बीवी जो होती है वह कोई सैलरी पर नहीं होती उसके परिवार को संभालती है और अपनी जिम्मेदारी पर अटल रहती है मैं बड़े दुख के साथ यह खबर लगा रहा हूं अगर जो कोई समझदार है तो इंसान बनने की कोशिश करें नहीं तो जानवर तो खैर है ही हो आप सबका शुभचिंतक ऐसी-ऐसी नई अपडेट देता रहेगा
जन सहारा हिंदी समाचार पत्र
जनसहारा न्यूज़ में आप लोगों का स्वागत है मैं मिस्टर रहीमुद्दीन जैसा कि आप लोग जानते हैं बुलडोजर बाबा का आजकल ज्यादा नाम है क्या कोई सा भी प...
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